गोरखा समाज के लिए हीरो बने अहलुवालिया, भारत पहुंचा देहरादून की दिवंगत महिला का पार्थिव शरीर

आखिरकार 16 दिनों के लंबे समय के बाद देहरादून के मशहूर समाजसेवी सूर्यबिक्रम शाही की धर्मपत्नी रीता शाही का पार्थिव देह गुरुवार सुबह 5 बजे नई दिल्ली पहुंच गया। गोरखा महिला पार्थिव देह के साथ विदेश में हो रहे रहे लेट लतीफी के बीच दार्जिलिंग के सांसद और केंद्रीय मंत्री एसएस अहलुवालिया ने पूरे प्रकरण में अनुकरणीय पहल करते हुए, अपने व्यक्तिगत प्रयासों से विदेशमंत्री सुषमा स्वराज के मार्फत डेनमार्क और तुर्की के काउंसलर गवर्नर ऑफ़ इंडिया (CGI) को तलब करते हुए पूरे मामले को सुलझाने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद उक्त पार्थिव शरीर को भारत पहुंचाने की कवायद तेज हो गयी। स्वयं सांसद अहलूवालिया ने गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के महासचिव रोशन गिरी के आग्रह पर पूरे मामले को संसद के मौजूदा सत्र में बेहद व्यस्त रहने के बाद भी संज्ञान में लिया, और इसके निवारण के लिए सफल प्रयास किए। इस पूरे दुखद घटनाक्रम में उत्तराखंड राज्य के पूर्व मंत्री एनएस राणा ने भी शाही परिवार के साथ दुःख की घड़ी में साथ दिया और पूरे मामले को विदेश मंत्रालय तक भी ले गए।

6 मार्च को डेनमार्क में दिल का दौरा पड़ने से निधन
भारत वापसी के लिए गौरतलब है कि 6 मार्च को डेनमार्क में कार्य कर रहे रीता शाही का दिल का दौरे  के बाद ब्रेन हैमरेज से निधन हो गया था एवं उसके बाद उनका पार्थिव शरीर अंत्येष्टि के लिए भारत लाया जाना था। इस बीच इस्तांबुल एयरपोर्ट पर बेहद मानवीय व्यवहार के चलते उनकी बॉडी को जबरन रोका गया था।

हिन्दू रीति रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार
दिवंगत के पुत्र सुशांत शाही दिल्ली से पार्थिव शरीर लेकर देहरादून के लिए रवाना हुए। गुरुवार शाम को देहरादून स्थित निवास में श्रद्धांजलि कार्यक्रम के उपरान्त चंद्रबनी स्थित मुक्तिद्वार में उनका हिन्दू रीति रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर गोदावरी थापली, ईश्वर थापा, सारिका थापा, देवीन शाही, पदम् मल्ल, ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) पीएस गुरुंग, रुड़की से बुद्धिमान सिंह राना, दिल्ली से समीर प्रधान, मीनू छेत्री, मीनू आले के अलावा समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

दार्जिलिंग के सांसद अहलुवालिया ने किया भरसक प्रयास
गोरखा समाज के लिए आगे आकर काम करने वाले केंद्रीय मंत्री एवं दार्जिलिंग के सांसद एसएस अहलुवालिया के इस बेहतरीन कार्य की पूरे दुनिया में रहने वाले गोरखा समुदाय के लोग प्रशंसा कर रहे है। दार्जिलिंग के सांसद होने के बावजूद उनका दूर के राज्य उत्तराखंड  महिला के लिए आगे आकर कार्य करना उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को और अधिक उंचाईयों पर ले गयी है।

दीपक राई
वीर गोरखा न्यूज पोर्टल

Comments

Popular posts from this blog

Biker Dead in Sikkim Accident

Prostitution, flesh trade, brothels, red light areas - The dirtiest business of selling girls, selling life

Largest casino chain Deltin enters Sikkim